पौधा रोपण करना तो बहुत अच्छी बात हैं लेकिन क्या आपने पौधा रोपण करने के बाद अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई हैं जैसे आप अपने घर के बच्चे को जन्म देने के बाद उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी उठाते हैं।
इस सवाल का जवाब शायद हर किसी के पास नहीं होगा। क्योंकि सच्चाई तो यही है कि हम कुछ समय तक तो उन पौधों की देखभाल कर लेते हैं लेकिन दो-चार दिन बाद ही जब हम अपने काम में व्यस्त हो जाते है तो यह भूल जाते हैं कि हमने कई जगह जाकर पौधो रोपण किया, फोटो खिचवाई, अखबार में छपवाया और फिर उस काम को नजरअंदाज कर दिया। क्या इस तरह हमारा पौधा रोपण करके उसे न सिंचना हमारी मानसिक कमजोरी है या मजबूरी इस बात का फैसला आप खुद ही कर लीजिए।
हम जब अपने बच्चे को जन्म देते हैं तो उसे कभी नहीं भूलते। उसकी परवरिश पूरी तरह करते हैं। उसे खाद, पानी यानी संस्कार, शिक्षा सबकुछ समय-समय पर देते रहते हैं ताकि एक दिन वह बच्चा बड़ा होकर आपका नाम रोशन करें, आपको खुशियाँ, सुख-सुविधाएँ दें और आप निश्चिंत होकर भगवान के घर की ओर प्रस्थान कर सकें। लेकिन क्या पौधों को आपने इस तरह की परवरिश देते दे्खा हैं।
एक बारगी हमारे परिवार वाले, रिश्तेदार, हमारे खुद के बच्चे हमारे साथ धोखा करके हमें नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये बिना मुख के पेड़-पौधे पूरे जीवन हमारी रक्षा करते हैं। हमें अनाज देकर हमारे जीवन को धन्य करते हैं। वे हमें कभी भी उपेक्षित नहीं करते। हम भले ही एक बार उनकी उपेक्षा कर जाएँ, समयाभाव में उनकी देखरेख करना भूल जाएँ। उन्हें पानी पिलाना, खाद देना भले ही भूल जाए लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाते हैं।
जब एक नन्हा पौधा बड़ा होकर एक वृक्ष का रूप धारण करता है। तो वह हमारे पीढ़ी दर पीढ़ी को अपनी सुख की छाया में बिठाकर फल-फूल देकर तृप्त करता रहता है। ऐसे पेड़ों को सिर्फ जगह-जगह पौधा रोपण करके उन्हें भूल जाना मानवीयता की एक बहुत बड़ी भूल है। जिसकी कीमत हर मनुष्य को चुकानी पड़ेगी। एक इंसान का काम सिर्फ पौधे लगाना नहीं है, उसकी उचित देखभाल, साज-सँवर भी बहुत जरूरी है।
इसलिए पर्यावरण दिवस मनाने और पौधा रोपण करके अपने कर्तव्यों से इतिश्री न करें। उनकी सही परवरिश करके उन्हें विशालकाय रूप लेने में उनकी मदद करें। तभी हमारा पर्यावरण दिवस मनाने का, और पौधा रोपण करने का किया गया प्रयास सार्थक होगा। और हम सही मायने में पर्यावरण दिवस को मनाने के हकदार कहलाएँगे।
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